MCG Big Plan: Gurugram में जलभराव रोकने को 109 मॉड्यूलर रेन वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट्स बनेंगे
निगम ने शहर के उन 109 'हॉटस्पॉट' (अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों) की पहचान की है, जहां मानसून के दौरान हर साल सबसे ज्यादा जलभराव होता है। यह परियोजना विशेष रूप से इन चिन्हित स्थानों पर क्रियान्वित की जाएगी, जिसका मुख्य लक्ष्य अगली बारिश से पहले शहर को जलभराव-मुक्त बनाना है।

MCG Big Plan : मानसून में गुरुग्राम की सड़कों पर होने वाले भारी जलभराव से स्थानीय निवासियों को जल्द ही स्थायी राहत मिलने वाली है। नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) ने शहर के 109 अति-संवेदनशील स्थानों पर मॉड्यूलर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (Modular Rain Water Harvesting System) लगाने की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। लगभग 15 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को निगम आयुक्त और वित्त एवं संविदा समिति (F&CC) से हरी झंडी मिल चुकी है।
निगम ने शहर के उन 109 ‘हॉटस्पॉट’ (अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों) की पहचान की है, जहां मानसून के दौरान हर साल सबसे ज्यादा जलभराव होता है। यह परियोजना विशेष रूप से इन चिन्हित स्थानों पर क्रियान्वित की जाएगी, जिसका मुख्य लक्ष्य अगली बारिश से पहले शहर को जलभराव-मुक्त बनाना है।
चिन्हित क्षेत्रों में प्रमुख रूप से सेक्टर 15 (पार्ट 1 और 2), सेक्टर 21, सेक्टर 31, सेक्टर 23ए, नंदी धाम गौशाला, सेक्टर 24, और वार्ड 26, 21, 20, 23 जैसे घनी आबादी वाले इलाके शामिल हैं।
यह योजना सिर्फ जलभराव की समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भूजल संरक्षण के लिए भी एक बड़ा कदम है। मॉड्यूलर सिस्टम बारिश के पानी को सड़कों पर जमा होने से रोकेगा और सीधे भूमिगत जलस्रोतों में पुनर्भरण (Recharge) करेगा। यह पहल गुरुग्राम के तेजी से गिरते जल स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जो लंबे समय से एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय रहा है।
एमसीजी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “इन उच्च क्षमता वाले मॉड्यूलर सिस्टमों को स्थापित करने के लिए अनुभवी एजेंसियों का चयन किया जाएगा, ताकि इनकी गुणवत्ता और कार्यक्षमता सुनिश्चित हो सके। हमारा लक्ष्य शहर को जलभराव की समस्या से स्थायी रूप से मुक्त कराना है, जिससे आवाजाही सुगम हो और लोगों का जीवन आसान हो सके।”
इस परियोजना से गुरुग्राम के नागरिकों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे:
सुगम आवाजाही: सड़कों पर जलभराव कम होने से मानसून के दौरान यातायात में होने वाली रुकावटें खत्म होंगी।
स्वच्छता और स्वास्थ्य: जमा पानी में पनपने वाले मच्छरों और बीमारियों के खतरे में कमी आएगी।
बुनियादी ढांचे का संरक्षण: जलभराव से सड़कों, इमारतों और अन्य बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान से बचाव होगा।
जल सुरक्षा: बारिश के पानी का प्रभावी उपयोग भूजल स्तर को बढ़ाने में सहायक होगा।
एमसीजी की यह पहल शहर के शहरी नियोजन (Urban Planning) और जल प्रबंधन (Water Management) की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव लाने की उम्मीद है।














